संपादक-शम्भु चौधरी

ताजा समाचार

लोकगीत ऐ प्रांण, आपणी संस्क्रति रा आपरी संस्कृति अर परम्परा रै पांण राजस्थान री न्यारी पिछाण। रणबंका वीरां री आ मरुधरा तीज-तिवारां में ई आगीवांण। आं तीज-तिवारां नै सरस बणावै अठै रा प्यारा-प्यारा लोकगीत। जीवण रो कोई मौको इस्यो नीं जद गीत नीं गाया जावै। जलम सूं पैली गीत, आखै जीवण गीत अर जीवण पछै फेर गीत। ऐ गीत इत्ता प्यारा, इत्ता सरस कै गावणिया अर सुणणियां रो मन हिलोरा लेवण लागै।

आपणी भाषा आपणी बात एक दिल से जुड़े मुद्दे के रूप में उदयपुर में `मायड़ भाषा´ स्तंभ से शुरू किया और राजस्थान की भाषा संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने को आतुर लोगों ने मान लिया कि संवैधानिक दर्जा दिलाना अब भास्कर का मुद्दा हो गया है। - कीर्ति राणा, संपादक - दैनिक भास्कर ( श्रीगंगानगर संस्करण)

श्री अरूण डागा का परिचय इन दिनों संगीत की दुनिया में प्राइवेट एलबम की धूम मची हुई है। इसके लिये किसी भी गायक को अपनी पूरी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। आज यहाँ हम कोलकाता के श्री अरूण डागा का परिचय आप सभी से करवातें हैं मूझे याद है जब श्री अरूण जी, गोपाल कलवानी के अनुरोध पर कोलकाता के 'कला मंदिर सभागार' में मारवाड़ी युवा मंच के एक कार्यक्रम- "गीत-संगीत प्रतियोगिता" में जैसे ही गाना शुरू किये सारा हॉल झूमने लगा था। once more... once more...

यह क्षेत्र इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथ मुम्बई पर हुए आतंकवादी आक्रमण से एक सन्देश स्पष्ट है कि अब यदि समस्या को नही समझा गया और इसके जेहादी और इस्लामी पक्ष की अवहेलना की गयी तो शायद भारत को एक लोकतांत्रिक और खुले विचारों ......

झारखंड प्रान्त: स्थापना दिवस की तैयारी शुरू जमशेदपुर। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस पल को यादगार बनाने के लिए मंच के सदस्य तैयारियों में जुट गये हैं। .......

सेटन हॉल यूनिवर्सिटी में गीता पढ़ना अनिवार्य अमेरिका की सेटन हॉल यूनिवर्सिटी में सभी छात्रों के लिए गीता पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है।इस यूनिवर्सिटी का मानना है कि छात्रों को सामाजिक सरोकारों से रूबरू कराने के लिए गीता से बेहतर कोई और माध्यम नहीं हो सकता है।......

डॉ.श्यामसुन्दर हरलालका निर्विरोध नये अध्यक्ष पूर्वोत्तर मारवाड़ी सम्मेलन की प्रादेशिक कार्यकारिणी बैठक एवं प्रादेशिक सभा की बैठक नगाँव में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक को सफल बनाने में उपस्थित सभासदों का योगदान सराहनीय रहा। सभा में आगामी सत्र वर्ष 2009 एवं 2010 हेतु गौहाटी के डॉ.श्यामसुन्दर हरलालका को निर्विरोध नये अध्यक्ष के रूप में चुने गये।.......

उत्कल प्रान्तीय मारवाड़ी युवा मंच उत्कल प्रान्तीय मारवाड़ी युवा मंच की सप्तम प्रान्तीय कार्यकारिणी समिति की चतुर्थ बैठक एवं 19वीं प्रान्तीय सभा ‘प्रगति-2008’’ भारी सफलता के साथ सह राउरकेला शाखा के अतिथ्य में सम्पन्न हुई। ......

परिचय: श्री श्यामानन्द जालान 13 जनवरी 1934 को जन्मे श्री जालान का लालन पालन एवं शिक्षा-दीक्षा मुख्यतः कलकत्ता एवं मुजफ्फरपुर में ही हुई हैं। बचपन से राजनैतिक वातावरण में पले श्री जालान के पिता स्वर्गीय श्री ईश्वरदास जी जालान पश्चिम बंगाल विधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे।

दक्षिण दिल्ली शाखा के सौजन्य में 18 जनवरी 2009 को ’’ट्रेजर हण्ट कार रैली’’अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा चलाये जा रहे देशव्यापी कन्या भ्रूण संरक्षण अभियान के अन्तर्गत देशभर में मंच की शाखाओं द्वारा विविध प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागृति अभियान चलाया जा रहा है।

Rajiv Ranjan Prasadसाहित्य शिल्पी ने अंतरजाल पर अपनी सशक्त दस्तक दी है। यह भी सत्य है कि कंप्यूटर के की-बोर्ड की पहुँच भले ही विश्वव्यापी हो, या कि देश के पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में हो गयी हो किंतु बहुत से अनदेखे कोने हैं, जहाँ इस माध्यम का आलोक नहीं पहुँचता। यह आवश्यकता महसूस की गयी कि साहित्य शिल्पी को सभागारों, सडकों और गलियों तक भी पहुचना होगा। प्रेरणा उत्सव इस दिशा में पहला किंतु सशक्त कदम था।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी का साहित्यकार सम्मान समारोह: Dr.Kavita Vachaknavee

इलाहाबाद, 6 फ़रवरी 2009 । "साहित्य से दिन-ब-दिन लोग विमुख होते जा रहे हैं। अध्यापक व छात्र, दोनों में लेखनी से लगाव कम हो रहा है। नए नए शोधकार्यों के लिए सहित्य जगत् में व्याप्त यह स्थिति अत्यन्त चिन्ताजनक है।"">

मंच एक कार्यशाला है

मारवाड़ी युवा मंच एक कार्यशाला है जहाँ समाज के नवयुवकों को न सिर्फ सामाजिक भावनाओं के साथ जोड़ा जाता है साथ ही उनके व्यक्तित्व को उभारने हेतु एक मंच भी दिया जाता है। मंच को एक शिक्षण संस्थान की तरह कार्य करने की जरूरत है न कि एक राजनीति मंच की तरह, इसके अनुभवी युवा वर्ग को मात्र एक शिक्षक की भूमिका अपनाने की जरूरत है। जबकि इसके विपरीत अनुभवी युवागण अधिकतर मंच की राजनीति में संलग्न पाये जातें हैं।

March 4, 2009

गाकर जी लेता हूँ: पण्डित जसराज

Pandit Jasraj, Pramod Shah and  Dr. Krishn Bihari Mishra
संगीत मार्तण्ड पद्मविभूषण पंडित जसराज प्रमोद शाह द्वारा तीन खंडों में परिकल्पित, संकलित एवं संपादित पुस्तक ‘थॉट्स ऑन रिलीजियस पॉलिटिक्स इन इंडिया’ (1857-2008) का लोकार्पण करते हुए। साथ में हैं डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र, प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश, श्री हरि कृष्ण चौधरी और एकदम बायें प्रमोद शाह।

कोलकाता: भारत को साहित्य व संगीत को साथ लेकर चलने की जरुरत है, इसी से मनुष्यता और सद्भाव बचेगा। मुझे कुछ लिखना-पढ़ना नहीं आता। जो कुछ है, उसे गाकर जी लेता हूँ। ये बातें संगीत मार्तण्ड पद्मविभूषण पंडित जसराज ने प्रमोद शाह द्वारा तीन खंडों में परिकल्पित, संकलित एवं संपादित पुस्तक ‘थॉट्स ऑन रिलीजियस पॉलिटिक्स इन इंडिया’ (1857-2008) का लोकार्पण करते हुए कही। समारोह की अध्यक्षता डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने की। समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश ने भी अपने विचार रखे।
Religious Politics In Indiaभारतीय भाषा परिषद में आयोजित लोकार्पण समारोह में पंडित जसराज ने कहा, ‘मैं एक समारोह में गा रहा था तो पीछे से किसी ने फरमाया, अल्लाह हो मेहरबान। इसे सुन कर मैं क्षण भर के लिए खो गया इसके बारे में जब मैंने अपनी बेटी को फोन किया, तो उसने बताया कि भगवान ने आपको एक विशेष काम के लिए धरती पर भेजा है। अपना विचार प्रस्तुत करने के बाद पंडित जसराज ने ‘चिदानन्द शिवोह्म, अल्लाह हो मेहरबान’ और शिवशंकर महादेव गाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। हर-हर महादेव कहते हुए उन्होंने प्रमोद शाह को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा, मेरे मुंह से अभी हर-हर महादेव का स्वर निकला है। इसलिए आपकी यह किताब दुनिया को बहुत पसंद आयेगी।’ मौके पर प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश ने कहा कि सांप्रदायिकता धार्मिक नहीं राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इतिहास के गड़े मुर्दे को उखाड़ने से देश शक्तिशाली नहीं होगा। जो भारत को गढ़ना और बनाना चाहते हैं, उन्हें भाषा, धर्म, जाति और समुदाय से ऊपर उठ कर सद्भाव बनाने की पहल करनी चाहिए। समारोह की अध्यक्षता मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि साहित्य, संगीत व अध्यात्म का स्वर राजनीति छोड़ दे, तो वह लंगड़ी हो जायेगी। रामकृष्ण परमहंस व महात्मा गांधी से बड़ा धर्मनिरपेक्ष कौन हो सकता है? गांधी और गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे लोगों ने समझाया कि सभी मनुष्य एक हैं। गांधी जी ने सचेत करते हुए कहा था कि आज हमारा देश अधार्मिक हो रहा है। लोकार्पित पुस्तक के बारे में डॉ. मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए प्रेरक और हमारी पीढ़ी के लिए गौरव की बात है। समारोह में पंडित जसराज की उपस्थिति ने समारोह में प्राण प्रतिष्ठा कर दी है। प्रमोद शाह ने पुस्तक को संपादित करने में जो अनुभव और संघर्ष झेला, उसे सुनाया और कहा कि धर्म अलग है। धर्म के नाम पर राजनीति अलग है। धर्म को संस्कृति में रखने पर देश सुधरता है और राजनीति में रखने पर विकृत होता है। धार्मिक मतभेदों को भुला कर हमें देश को खुशहाल करने की कोशिश करनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन नंदलाल शाह व स्वागत भाषण संयोजक महेश चन्द्र शाह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ.शशि शेखर शाह ने किया। सोसायटी फाॅर नेशनल अवेयरनेस के अध्यक्ष व प्रकाशक हरि कृष्ण चौधरी ने कहा कि आनेवाली पीढ़ी के लिए यह पुस्तक प्रेरणादायक साबित होगी। कार्यक्रम के शुरुआत में श्रीमती अनुराधा खेतान ने तीनों पुस्तकों का ऑडिओ-वीडियो चित्रण दिया।

February 18, 2009

मायड़ भाषा दिवस उत्साह पूर्वक मनाने का आह्वान


हनुमानगढ़, 19 फरवरी।
अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति ने 21 फरवरी को विश्व मायड़ भाषा दिवस उत्साह पूर्वक मनाने का आह्वान किया है। समिति की विज्ञप्ति के अनुसार 21 फरवरी, 1952 को बांगला भाषा के मान की रक्षार्थ चार नवयुवकों के बलिदान की याद में यूनेस्को ने इस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया है।
संघर्ष समिति ने आह्वान किया है कि राजस्थान प्रांत की मातृभाषा राजस्थानी राजनीतिक उपेक्षा की शिकार है तथा प्रत्येक राजस्थानी को उसके मान-सम्मान के लिए संघर्ष करना चाहिए। समिति ने हर गांव-कस्बे और शहर में राजस्थानी सांस्कृतिक समारोह आयोजित कर अमरीका सरकार द्वारा राजस्थानी को मान्यता दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करने तथा देश-प्रदेश में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष का संकल्प लेने का आह्वान किया है। समिति की ओर से इस दिन राज्य के प्रत्येक संभाग मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन तथा मुखपत्ती सत्याग्रह आयोजित किए जाएंगे।


प्रेषक-
सत्यनारायण सोनी
प्रदेश मंत्री
अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति,
राजस्थान।
ठिकाणो- परलीका (हनुमानगढ़)

February 17, 2009

सत्यनारायण सोनी राजस्थानी रा समरथ लिखारा। कहाणी लेखन सारू मोकळो मान-सनमान पायो। आजकाल हनुमानगढ़ जिला री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, परलीका मांय व्याख्याता (हिन्दी) पद माथै कार्यरत।
बांचो आं रो ओ खास लेख-

ओबामा सरकार नै घणा-घणा रंग
मान बध्यो मायड़ रो

-सत्यनारायण सोनी


राजस्थानियां वास्तै आज हरख-उमाव रो दिन है। खुशियां मनावण रो दिन है। नाचण-गावण रो दिन है। मौज मनावण रो दिन है। दुनिया रै सब सूं तागतवर मानीजण वाळै देस अमरीका राजस्थान री भासा नै सरकारी स्तर पर मान्यता देययर राजस्थान अर राजस्थानी रो मान बधायो है। अमरीका सरकार रै राजनीतिक पदां सारू जका आवेदन करीजैला, वां में दुनिया री 101 भासावां में सूं किणी भासा रा जाणकार आवेदन कर सकैला। वां में सूं 20 भासावां भारत री है। जिणां मांय सूं मारवाड़ी, हरियाणवी, छतीसगढ़ी, भोजपुरी, अवधी अर मगधी ऎड़ी भासावां हैं जिकी अजे तांईं भारतीय संविधान री आठवीं अनुसूची में आपरी जिग्यां नीं थरप सकी।
राजस्थान रा जका लोग बारै बसै, वां नै मारवाड़ी अर वां री भासा पण मारवाड़ी नांव सूं जाणीजै। अमरीका में 'राजस्थान एशोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमरीकाय (राना) नांव सूं एक जबरो संगठन है। राना रा प्रतिनिधि डॉ. शशि शाह बतावै कै अमरीका में राजस्थानी रै पर्याय रूप में मारवाड़ी सबद घणो चलन में है। मारवाड़ी राजस्थानी रो ई दूजो नांव है।
अमरीका सरकार हरियाणवी नै भी मान्यता दीनी है। हरियाणवी भी राजस्थानी भासा रो एक रूप है। भासा वैग्यानिकां घणकरै हरियाणा प्रांत नै राजस्थानी भासी क्षेत्र रै रूप में गिण्यो है। हरियाणवी अर राजस्थानी संस्कृति एकमेक है, तो भासा री समरूपता रै ई कारण।
अमरीका री शिकागो यूनिवर्सिटी मांय भी राजस्थानी बरसां सूं पढ़ाई जावै। इण यूनिवर्सिटी मांय राजस्थानी रो न्यारो-निरवाळो विभाग भी थरपीज्योड़ो है। अमरीका री एक संस्था 'लायब्रेरी ऑफ कांग्रेसय बरसां पैली विश्व भासा सर्वेक्षण करवायो तो दुनिया री तेरह समृद्धतम भासावां में राजस्थानी आपरी ठावी ठौड़ थरपी।
जिकी भासा रो दुनिया में इत्तो मान-सम्मान। वा आपरै घर राजस्थान में ई दुत्कारीजै तो काळजो घणो ई बळै। आपरी मायड़ रो ओ अपमान सहन नीं हुवै। कित्ती अजोगती बात है कै राजस्थान रो एक विधायक, जको राजस्थान रो जायो-जलम्यो, राजस्थानी माटी में पळ्यो-बध्यो, राजस्थानी भासा रा संस्कार लेययर विधानसभा पूग्यो। राजस्थान री विधानसभा में बो दूजी 22 भासावां में भासण देय सकै, पण आपरी मायड़भासा में शपथ भी नीं लेय सकै! राजस्थान रै स्कूलां में पैली भासा रै रूप मांय हिन्दी पढ़ाई जावै। राजस्थानी लोग उणरो स्वागत करै। पण दूसरी भासा रै रूप में राजस्थानी री मांग करै। पण राजस्थानी तो तीजी भासा रै रूप में भी नीं सिकारीजै। तीजी भासा रै रूप में दूजै प्रांतां री दर्जनभर भासावां पढ़ाई जावै, तो राजस्थान री राजस्थानी क्यूं नीं? सेठियाजी कैयो-


आठ करोड़ मिनखां री मायड़
भासा समरथ लूंठी।
नहीं मानता द्यो तो टांगो
लोकराज नै खूंटी॥


अमरीका में बसण वाळा राजस्थानियां नै घणा-घणा रंग! ओबामा सरकार नै घणा-घणा रंग! वां राजस्थान अर राजस्थानी रो मान बधायो है। 21 फरवरी दुनियाभर में 'विश्व मातृभाषा दिवसय रै रूप में मनाइजै। अखिल भारतीय राजस्थानी भासा मान्यता संघर्ष समिति राजस्थानी नै संवैधानिक मानता री मांग नै लेययर प्रदेश रा सगळा संभाग मुख्यालयां पर धरना-प्रदर्शन अर मुखपत्ती सत्याग्रह करैला। आपां नै भी आपणी भासा रै मान-सनमान वास्तै लारै नीं रैवणो है।

-परलीका (हनुमानगढ़)
Email- aapnibhasha@gmail.com
blog- www.aapnibhasha.blogspot.com

February 15, 2009

हिन्दुस्तानी एकेडेमी का साहित्यकार सम्मान समारोह:

Dr.Kavita Vachaknavee


इलाहाबाद, 6 फ़रवरी 2009 ।
"साहित्य से दिन-ब-दिन लोग विमुख होते जा रहे हैं। अध्यापक व छात्र, दोनों में लेखनी से लगाव कम हो रहा है। नए नए शोधकार्यों के लिए सहित्य जगत् में व्याप्त यह स्थिति अत्यन्त चिन्ताजनक है।" उक्त विचार उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मन्त्री डॊ.राकेश धर त्रिपाठी ने हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा आयोजित सम्मान व लोकार्पण समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उत्तर प्रदेश भाषा विभाग द्वारा संचालित हिन्दी व उर्दू भाषा के संवर्धन हेतु सन् 1927 में स्थापित हिन्दुस्तानी एकेडेमी की श्रेष्ठ पुस्तकों के प्रकाशन की श्रृंखला में इस अवसर पर अन्य पुस्तकों के साथ एकेडेमी द्वारा प्रकाशित डॊ. कविता वाचक्नवी की शोधकृति "समाज-भाषाविज्ञान : रंग-शब्दावली : निराला-काव्य" को लोकार्पित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह पुस्तक अत्यन्त चुनौतीपूर्ण विषय पर केन्द्रित तथा शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक है। इस अवसर पर एकेडेमी के सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा सम्पादित 'सूर्य विमर्श' तथा एकेडेमी द्वारा वर्ष १९३३ ई. में प्रकाशित की गयी पुस्तक 'भारतीय चित्रकला' का द्वितीय संस्करण (पुनर्मुद्रण) भी लोकार्पित किया गया। किन्तु जिस पुस्तक ने एकेडेमी के प्रकाशन इतिहास में एक मील का पत्थर बनकर सबको अचम्भित कर दिया है वह है डॉ. कविता वाचक्नवी द्वारा एक शोध-प्रबन्ध के रूप में अत्यन्त परिश्रम से तैयार की गयी कृति "समाज-भाषाविज्ञान : रंग-शब्दावली : निराला-काव्य"। इस सामग्री को पुस्तक का आकार देने के सम्बन्ध में एक माह पूर्व तक किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। स्वयं लेखिका के मन में भी ऐसा विचार नहीं आया था। लेकिन एकेडेमी के सचिव ने संयोगवश इस प्रकार की दुर्लभ और अद्‌भुत सामग्री देखते ही इसके पुस्तक के रूप में प्रकाशन का प्रस्ताव रखा जिसे सकुचाते हुए ही सही इस विदुषी लेखिका द्वारा स्वीकार करना पड़ा। कदाचित्‌ संकोच इसलिए था कि दोनो का एक-दूसरे से परिचय मुश्किल से दस-पन्द्रह मिनट पहले ही हुआ था। यह नितान्त औपचारिक मुलाकात अचानक एक मिशन में बदल गयी और देखते ही देखते मात्र पन्द्रह दिनों के भीतर न सिर्फ़ बेहद आकर्षक रूप-रंग में पुस्तक का मुद्रण करा लिया गया अपितु एक गरिमापूर्ण समारोह में इसका लोकार्पण भी कर दिया गया। रंग शब्दों को लेकर हिन्दी में अपनी तरह का यह पहला शोधकार्य है। इसके साथ ही साथ महाप्राण निराला के कालजयी काव्य का रंगशब्दों के आलोक में किया गया समाज-भाषावैज्ञानिक अध्ययन भावी शोधार्थियों के लिए एक नया क्षितिज खोलता है। निश्चय ही यह पुस्तक हिदी साहित्य के अध्येताओं के लिए नयी विचारभूमि उपलब्ध कराएगी।
Dr.Kavita Vachaknavee's Book
इस समारोह में एकेडेमी की ओर से हिन्दी, संस्कृत एवम उर्दू के दस लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों प्रो. चण्डिकाप्रसाद शुक्ल, डॉ. मोहन अवस्थी, प्रो. मृदुला त्रिपाठी, डॉ. विभुराम मिश्र, डॉ. किशोरी लाल, डॉ. कविता वाचक्नवी, डॉ. दूधनाथ सिंह, डॉ. राजलक्ष्मी वर्मा, डॉ. अली अहमद फ़ातमी और श्री एम.ए.कदीर को सम्मानित भी किया गया। यद्यपि इनमें से डॉ. दूधनाथ सिंह, डॉ. राजलक्ष्मी वर्मा, डॉ. अली अहमद फ़ातमी और श्री एम.ए.कदीर अलग-अलग व्यक्तिगत, पारिवारिक या स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, तथापि सभागार में उपस्थित विशाल विद्वत्‌ समाज के बीच छः विद्वानों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए शाल, नारियल, व सरस्वती की अष्टधातु की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए। एकेडेमी द्वारा अन्य अनुपस्थित विद्वानों के निवास स्थान पर जाकर उन्हें सम्मान-भेंट व प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर दिया जाएगा।
सम्मान स्वीकार करते हुए अपने आभार प्रदर्शन में डॊ. कविता वाचक्नवी ने कहा कि इस लिप्सापूर्ण समय में कृति की गुणवता के आधार पर प्रकाशन का निर्णय लेना और रचनाकार को सम्मानित करना हिन्दुस्तानी एकेडेमी की समृद्ध परम्परा का प्रमाण है, जिसके लिए संस्था व गुणग्राही पदाधिकारी निश्चय ही साधुवाद के पात्र हैं।
आरम्भ में हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सचिव डॊ. एस. के. पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं संस्कृत के विद्वान हैं , उनके कार्यकाल में एकेडेमी का सारस्वत कायाकल्प हो गया है। इस अवसर पर समारोह के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त ने सरस्वती दीप प्रज्वलित किया और सौदामिनी संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। एकेडेमी के ही अधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने खचाखच भरे सभागार में उपस्थित गण्यमान्य साहित्यप्रेमियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। *