संपादक-शम्भु चौधरी

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लोकगीत ऐ प्रांण, आपणी संस्क्रति रा आपरी संस्कृति अर परम्परा रै पांण राजस्थान री न्यारी पिछाण। रणबंका वीरां री आ मरुधरा तीज-तिवारां में ई आगीवांण। आं तीज-तिवारां नै सरस बणावै अठै रा प्यारा-प्यारा लोकगीत। जीवण रो कोई मौको इस्यो नीं जद गीत नीं गाया जावै। जलम सूं पैली गीत, आखै जीवण गीत अर जीवण पछै फेर गीत। ऐ गीत इत्ता प्यारा, इत्ता सरस कै गावणिया अर सुणणियां रो मन हिलोरा लेवण लागै।

आपणी भाषा आपणी बात एक दिल से जुड़े मुद्दे के रूप में उदयपुर में `मायड़ भाषा´ स्तंभ से शुरू किया और राजस्थान की भाषा संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने को आतुर लोगों ने मान लिया कि संवैधानिक दर्जा दिलाना अब भास्कर का मुद्दा हो गया है। - कीर्ति राणा, संपादक - दैनिक भास्कर ( श्रीगंगानगर संस्करण)

श्री अरूण डागा का परिचय इन दिनों संगीत की दुनिया में प्राइवेट एलबम की धूम मची हुई है। इसके लिये किसी भी गायक को अपनी पूरी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। आज यहाँ हम कोलकाता के श्री अरूण डागा का परिचय आप सभी से करवातें हैं मूझे याद है जब श्री अरूण जी, गोपाल कलवानी के अनुरोध पर कोलकाता के 'कला मंदिर सभागार' में मारवाड़ी युवा मंच के एक कार्यक्रम- "गीत-संगीत प्रतियोगिता" में जैसे ही गाना शुरू किये सारा हॉल झूमने लगा था। once more... once more...

यह क्षेत्र इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथ मुम्बई पर हुए आतंकवादी आक्रमण से एक सन्देश स्पष्ट है कि अब यदि समस्या को नही समझा गया और इसके जेहादी और इस्लामी पक्ष की अवहेलना की गयी तो शायद भारत को एक लोकतांत्रिक और खुले विचारों ......

झारखंड प्रान्त: स्थापना दिवस की तैयारी शुरू जमशेदपुर। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस पल को यादगार बनाने के लिए मंच के सदस्य तैयारियों में जुट गये हैं। .......

सेटन हॉल यूनिवर्सिटी में गीता पढ़ना अनिवार्य अमेरिका की सेटन हॉल यूनिवर्सिटी में सभी छात्रों के लिए गीता पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है।इस यूनिवर्सिटी का मानना है कि छात्रों को सामाजिक सरोकारों से रूबरू कराने के लिए गीता से बेहतर कोई और माध्यम नहीं हो सकता है।......

डॉ.श्यामसुन्दर हरलालका निर्विरोध नये अध्यक्ष पूर्वोत्तर मारवाड़ी सम्मेलन की प्रादेशिक कार्यकारिणी बैठक एवं प्रादेशिक सभा की बैठक नगाँव में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक को सफल बनाने में उपस्थित सभासदों का योगदान सराहनीय रहा। सभा में आगामी सत्र वर्ष 2009 एवं 2010 हेतु गौहाटी के डॉ.श्यामसुन्दर हरलालका को निर्विरोध नये अध्यक्ष के रूप में चुने गये।.......

उत्कल प्रान्तीय मारवाड़ी युवा मंच उत्कल प्रान्तीय मारवाड़ी युवा मंच की सप्तम प्रान्तीय कार्यकारिणी समिति की चतुर्थ बैठक एवं 19वीं प्रान्तीय सभा ‘प्रगति-2008’’ भारी सफलता के साथ सह राउरकेला शाखा के अतिथ्य में सम्पन्न हुई। ......

परिचय: श्री श्यामानन्द जालान 13 जनवरी 1934 को जन्मे श्री जालान का लालन पालन एवं शिक्षा-दीक्षा मुख्यतः कलकत्ता एवं मुजफ्फरपुर में ही हुई हैं। बचपन से राजनैतिक वातावरण में पले श्री जालान के पिता स्वर्गीय श्री ईश्वरदास जी जालान पश्चिम बंगाल विधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे।

दक्षिण दिल्ली शाखा के सौजन्य में 18 जनवरी 2009 को ’’ट्रेजर हण्ट कार रैली’’अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा चलाये जा रहे देशव्यापी कन्या भ्रूण संरक्षण अभियान के अन्तर्गत देशभर में मंच की शाखाओं द्वारा विविध प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागृति अभियान चलाया जा रहा है।

Rajiv Ranjan Prasadसाहित्य शिल्पी ने अंतरजाल पर अपनी सशक्त दस्तक दी है। यह भी सत्य है कि कंप्यूटर के की-बोर्ड की पहुँच भले ही विश्वव्यापी हो, या कि देश के पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में हो गयी हो किंतु बहुत से अनदेखे कोने हैं, जहाँ इस माध्यम का आलोक नहीं पहुँचता। यह आवश्यकता महसूस की गयी कि साहित्य शिल्पी को सभागारों, सडकों और गलियों तक भी पहुचना होगा। प्रेरणा उत्सव इस दिशा में पहला किंतु सशक्त कदम था।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी का साहित्यकार सम्मान समारोह: Dr.Kavita Vachaknavee

इलाहाबाद, 6 फ़रवरी 2009 । "साहित्य से दिन-ब-दिन लोग विमुख होते जा रहे हैं। अध्यापक व छात्र, दोनों में लेखनी से लगाव कम हो रहा है। नए नए शोधकार्यों के लिए सहित्य जगत् में व्याप्त यह स्थिति अत्यन्त चिन्ताजनक है।"">

मंच एक कार्यशाला है

मारवाड़ी युवा मंच एक कार्यशाला है जहाँ समाज के नवयुवकों को न सिर्फ सामाजिक भावनाओं के साथ जोड़ा जाता है साथ ही उनके व्यक्तित्व को उभारने हेतु एक मंच भी दिया जाता है। मंच को एक शिक्षण संस्थान की तरह कार्य करने की जरूरत है न कि एक राजनीति मंच की तरह, इसके अनुभवी युवा वर्ग को मात्र एक शिक्षक की भूमिका अपनाने की जरूरत है। जबकि इसके विपरीत अनुभवी युवागण अधिकतर मंच की राजनीति में संलग्न पाये जातें हैं।

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October 29, 2009

रजत जयंती वर्ष- प्रमोद्ध सराफ


मंच दर्शन की प्राण प्रतिष्ठा:ज्ञान ज्योति यात्रा का शुभारंभ


श्री प्रमोद्ध सराफ जी का नया लेख जो कि 'समाज विकास' पत्रिका के नये अंक - अक्टूबर '2009 में प्रकाशित हुआ है। "मंच समाचार" के पाठकों के लिये यहाँ पर जारी कर रहा हूँ। - शम्भु चौधरी


Pramod Sarafपरिचयः श्री प्रमोद्ध सराफ का जन्म 19 सितम्बर 1952, फतेहपुर (शेखावटी), पिता: श्री लक्ष्मी नारायण सराफ, पत्नी का नामः श्रीमती राजकुमारी सराफ, 1965 में छात्र नेता के बतौर सार्वजनिक जीवन में प्रवेश। आपको अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के संस्थापक राश्ट्रीय अध्यक्ष होने का गौरव प्राप्त है। मारवाड़ी दातत्व औषद्यालय गुवाहाटी के पूर्व मानद मंत्री एवम् कामरूप चैम्बर आफ कॉमर्स, आसाम, गुवाहाटी स्टॉक एक्सचैंज के आप पूर्व सभापति भी रह चुके हैं। आप सामाजिक विषयों के प्रतिष्ठित लेखक के रूप में जाने जाते हैं। आपके लेखों से युवावर्ग पर विषेश प्रभाव पड़ता है। कवि हृदय श्री प्रमोद्ध सराफ ने अनेकों कविताओं की रचना भी की है।
पताः सराफ बिल्डिंग, प्रथल तल, ए.टी.रोड, गुवाहाटी, असम, फोन: 0361-2541381।


अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच अपने रजत जयंती वर्ष का उत्सव मना रहा है। उत्सव भारतीय एवं मारवाड़ी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। उत्सव माध्यम होते हैं- जीवन में उत्साह संचार के। रजत जयंती समिति ने इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस उत्सव को मानने के क्रम में 100 दिवसीय ज्ञान ज्योति यात्रा का शुभारंभ, मंच के उद्गमस्थल गुवाहाटी शहर से मंच की जननी गुवाहाटी शाखा के स्थापना दिवस 9-10 अक्टूबर को किया है, जो मंच संस्कृति एवं मंच मूल्यों को दर्शाता है। मंच संस्कृति है-कृतज्ञता के भावों की। मंच मूल्य है-स्मृतियों को सजीव बनाना। इस यात्रा की 100 दिवसीय अवधि परिचायक है: मंच शाखाओं के सुदृढ़ आधार की एवं रजत जयंती समिति के नेतृत्व की शाखा नेतृत्व में अगाध विश्वास की। 100 दिवसीय यात्रा के आयोजन की कल्पना राजनैतिक दलों को भी दुष्कर प्रतीत होती है। ऐसी यात्रा की कल्पना, किसी सामाजिक संगठन द्वारा करना, निश्चित रूप से एक साहसिक कार्य है। इस साहसिक कार्य का बीड़ा उठाने हेतु रजत जयंती समिति के नेतृत्व वर्ग का अभिनन्दन। मंच साथी सोच सकते हैं कि इस कार्यक्रम का नामकरण ज्ञान ज्योति यात्रा क्यों किया गया। इस नाम का चयन सावधानी के साथ किया गया है। चंचलता एवं मनमौजीपन में इस कार्यक्रम का नामकरण नहीं किया गया है। यह नाम प्रतीकात्मक है। प्रतीकों का प्रयोग भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। इस कार्यक्रम के नाम में मंच नेतृत्व की कल्पनाऐं छिपी है, जिनका अनावरण यात्रा काल में होगा। नाम की प्रासंगिकता इस वातावरण में है, जिसमें यह नाम दिया गया है। यह ऐसा नाम है, जिसके अर्थ को क्षमतानुसार बढ़ाया जा सकता है। जब मंच से जुड़े साथियों का विभाग नाम से हटकर इस नाम में छिपी अन्तर्निहीत भावनाओं की तरफ केन्द्रित होने लगेगा, तब उपरोक्त उल्लेखित ‘क्यों’ स्वतः धूमिल होने लगेगा। ऐसी साहसिक यात्राओं का नाम शक्तिवान एवं चेतनाशील होना अति आवश्यक है। नाम से प्राप्त होने वाले संकेतों एवं यात्रा के अपेक्षित परिणामों में समानता एवं सामंजस्य है। यह नाम भावनात्मक संबल प्रदान करते हुए इस यात्रा के कठिन कार्यों को सहज बनाना है। उद्देश्यों को सजीव करता है।
मंच नेतृत्व में यात्रा के नाम एवं कार्यक्रमों में मंच दर्शन की प्राण प्रतिष्ठा की है। मंच दर्शन के अंतर्गत वर्णित मंच आधार एवं मारवाड़ी समाज की विरासत को ज्ञान ज्योति यात्रा का भी आधार बनाया गया है। मारवाड़ी युवा मंच नेतृत्व एवं शाखाओं ने पिछले 20 वर्षों में कृत्रिम अंग प्रदान शिविरों के आयोजन के माध्यम से शारीरिक रूप से अपंग भाई बहिनों की सेवा का ज्ञान अर्जित किया है। ज्ञान ज्योति यात्रा न्यौता देती है- उपरोक्त वर्णित ज्ञान के रजत जयंती वर्ष में विशेष उपयोग का न केवल अर्जित ज्ञान के उपयोग का बल्कि इस ज्ञान की अतिवृद्धि का भी। ज्ञान ज्योति यात्रा काल में शाखाएं कृत्रिम अंग प्रदान शिविरों का आयोजन कर अपंग भाई बहिनों की जिंदगी की ज्योति जगा सकती है। जिन शाखाओं ने अभी तक यह ज्ञान अर्जित नहीं किया है, वे प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से इस ज्ञान के अर्जन हेतु ऐसे शिविरों का आयोजन कर सकती हैं। रजत जयंती समिति की योजना है कि ज्ञान ज्योति यात्रा की 100 दिवसीय अवधि में कम से कम 100 कृत्रिम अंगप्रदाय शिविरों का आयोजन कर कम से कम 5000 अपंग भाई बहिनों के जीवन में आशादीप जलाए जाएं। हर शिविर में, शाखाओं के
अनुरोध पर,25 कृत्रिम पैर शाखाओं को निःशुल्क उपलब्ध करवाने की भी रजत जयंती समिति की योजना है।
ज्ञान ज्योति यात्रा काल में मंच शाखाओं को दिखाना है अपना कर्तव्य ज्ञान। निर्णय लेना है शिविरों के आयोजन का ज्ञान ज्योति यात्रा एक साथ ऐतिहासिक अवसर प्रदान कर रही है-ज्ञान के उपयोग एवं ज्ञान की अभिवृद्धि का।
मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता ने रजत जयंती वर्ष की थीम निर्धारित की है- ‘‘विकलांगता विहीन हो देश हमारा।’’ एक संदेश छिपा है इसमें। वह संदेश है कि देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि देश में विकलांगता समाप्त करने हेतु न केवल सचेष्ट हो बल्कि इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करे। इस उद्देश्य हेतु अर्थदान एवं श्रमदान करे। पुरानी कहावत है कि बूंद बूंद से घड़ा भरता है। विकलांगता विहीन देश का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब हम अपने क्षेत्र के निवासी विकलांग भाई बहिनों को चिन्हित करें व उनकी विकलांगता निवारण हेतु किसी सेवा भावी संस्था को प्रेरित एवं सक्रिय करें। सुप्रसिद्ध राजस्थानी कवि श्री सीताराम महर्षि की निम्न पंक्तियाँ थीम को बल देती प्रतीत होती हैं।


जिंदगी का हर कदम रख इस तरह प्यारे,
रोशनी का दायरा कुछ और बढ़ जाए।


पोलियो रोग से ग्रसित बच्चों की शल्य चिकित्सा हेतु शिविरों के आयोजन की कला का ज्ञान यद्यपि मंच शाखाओं में सीमित रूप में है। ज्ञान ज्योति यात्रा इस ज्ञान के अर्जन का शाखाओं को सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है। पोलियो रोग से ग्रसित बच्चों की शल्य चिकित्सा हेतु मंच के शीर्ष नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आदिनारायण राव, विशाखापट्टनम के नेतृत्व में देश के 10 राज्यों में ज्ञान ज्योति यात्राकाल में 10 शिविरों के आयोजन का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। इन शिविरों के माध्यम से प्रायः 1500 बच्चों की सेवा का लक्ष्य रजत जयंती समिति ने निर्धारित किया है। शाखाओं के शीर्ष नेतृत्व को शीघ्र निर्णय लेना है-इन शिविरों के आयोजन का मंच से जड़ित संपन्न युवा साथियों को इन शिविरों के आयोजन हेतु आवश्यक आर्थिक सहयोग देकर अपना कर्तव्यज्ञान प्रकट करना है। इन शिविरों के आयोजन में कमोबेश 1 करोड़ रुपयों के व्यय का अनुमान है। मंच नेतृत्व एवं कार्यकर्ताओं को इस उद्देश्य हेतु संपन्न समाज बंधुओं से आवश्यक अर्थसंग्रह कर अपने कर्तव्य ज्ञान का निर्वाह करता है। अतः समस्त युवासाथियों को अपनी क्षमतानुसार इस प्रकल्प में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर यौवन धर्म का निर्वाह करना है।
सिलीगुड़ी स्थित राष्ट्रीय विकलांग सेवा केन्द्र में पोलियोग्रसित बच्चों की शल्य चिकित्सा हेतु ज्ञान ज्योति यात्रा काल में स्थायी व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय भी रजत जयंती समिति के नेतृत्व की पहल पर लिया गया है। आशा है कि प्रस्तावित व्यवस्था का शुभारंभ दि. 17 जनवरी 2010 को सिलीगुड़ी के मंच साथियों द्वारा कर दिया जाएगा। हम समस्त मंच कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि सिलीगुड़ी में प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अवदान देकर इसे सफल बनाऐं व सिलीगुड़ी के साथियों का उत्साहवर्द्धन करें।
विश्व में 1 अक्टूबर विश्व रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चूंकि ज्ञान ज्योति यात्रा का शुभारंभ अक्टूबर माह में हुआ है एवं मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रक्तदान कार्यक्रम को मंच के राष्ट्रीय कार्यक्रम की संज्ञा दी है, अतः इस यात्रा काल में शाखाओं द्वारा रक्तदान शिविरों का आयोजन अपेक्षित है। यात्राकाल में कम से कम 2500 ब्लड यूनिट रक्तदान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अतः मंच शाखाओं का कर्तव्य है कि रक्तदान कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान करें।
मारवाड़ी युवा मंच का प्रथम राष्ट्रीय कार्यक्रम है। एम्बुलेंस सेवा, मंच द्वारा यह कार्यक्रम इस समय ग्रहण किया था जब ग्रामों एवं नगरों में ही नहीं बल्कि शहरों में भी रोगियों को एम्बुलेंस सेवाएं सहरूपेण उपलब्ध नहीं थी। मारवाड़ी युवा मंच के इस कार्यक्रम ने मारवाड़ी समाज के सामाजिक कर्तव्यबोध को उजागर किया। वर्तमान में 200 से अधिक शाखाओं द्वारा रोगियों को एम्बुलेंस सेवा में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मारवाड़ी युवा मंच के इस कार्यक्रम में अनेकानेक सेवा संगठनों का ध्यानाकर्षण किया एवं परिणामस्वरूप उन्होंने भी एम्बुलेंस सेवा प्रारंभ की। केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकार भी इस सेवा क्षेत्र में पिछले 2-3 वर्षों में अधिक सक्रिय हुई है। अतः विवेक की मांग है कि मारवाड़ी युवा मंच अपने इस कार्यक्रम को ऊपर की ओर उठाकर मोबाईल ग्रामीण ‘चिकित्सा डिस्पेंशरी’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ करें। इसके शीर्ष नेतृत्व ने ऐसा करने का निर्णय सिलीगुड़ी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में ले लिया था। रजत जयंती समिति के नेतृत्व ने ज्ञान ज्योति यात्रा काल में इस निर्णय के क्रियान्वयन की योजना बनाई है एवं निश्चित किया है कि देश के कम से कम 10 राज्यों में मोबाईल ग्रामीण चिकित्सा वाहनों के माध्यम से ग्रामीण चिकित्सा सुविधाएं प्रारंभ की जायें। आवश्यकतानुसार मंच कार्यक्रमों में बदलाव के ज्ञान को उजागर करता है-यह प्रस्तावित कार्यक्रम।
प्रस्तावित ज्ञान ज्योति यात्रा देश के 18 राज्यों से गुजरेगी। प्रतिदिन सैंकड़ों युवा हर कार्यक्रम के अवसर पर एकत्रित होंगे। समाज मनीषी भी इन कार्यक्रमों में उपस्थित होकर मंच साथियों को आशीर्वाद देंगे। मंच का शीर्ष नेतृत्व स्थानीय युवाओं से यात्रा के प्रत्येक स्वागत कार्यक्रम में रूबरू होगा। यह यात्रा मंच के शीर्ष नेतृत्व को अवसर प्रदान करेगी-सामाजिक कुरीतियों एवं रूढ़ियों के विरुद्ध जनमानस के निर्माण हेतु।
स्वसुधार की प्रवृत्ति विकसित करने के आह्वान हेतु। इसमें मंच दर्शन में वर्णित मंच भाव पुष्ट होगा।
ज्ञान ज्योति यात्रा काल में विभिन्न शहरों, नगरों एवं ग्रामों में समारोहों के आयोजन की भी योजना है। इन सम्मेलनों में मंच के वरिष्ठ सदस्यों एवं चुनिंदा समाज बंधुओं का सम्मान किये जाने का कार्यक्रम भी निश्चित किया गया है। यह कार्यक्रम वर्तमान में सक्रिय मंच सदस्यों को वरिष्ठ सदस्यों के व्यक्तित्व एवं अवदानों से परिचित करवाते हुए मंच के गौरवशाली इतिहास को उजागर करेगा। इन समारोहों में अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी चुनिंदा समाजबंधुओं का अभिनन्दन कर, इनके द्वारा प्रतिष्ठित मूल्यों एवं संस्कृति को उजागर करते हुए नमन किया जाएगा। ये प्रेरणादायी व्यक्तित्व युवाओं के दिलो दिमाग पर अमिट प्रभाव छोड़ेंगे एवं हमराही बनने का निमंत्रण देंगे। इस प्रकार ये समारोह ज्ञान्देयजनित चेतना उत्पन्न कर ज्ञानप्रवाह का सही माध्यम बनेंगे-ऐसे मेरी अपेक्षा है। इससे मंच शक्ति में वृद्धि होगी। युवा पीढ़ी को प्रेरक वातावरण मिलेगा। मंच शाखाओं का कर्तव्य है कि इन समारोहों में अपने क्षेत्र के कम से कम 25 क्षमतावान नए युवकों एवं युवतियों को समारोह स्थल तक लाएं व मंच नेतृत्व का दायित्व होगा कि मंच से अनजुड़े इन युवकों के अन्तर्मन में सामाजिक कर्तव्यों के निर्वाह की ज्योति आलोकित करे तभी वर्णित यात्रा सही मायनों में ज्ञान ज्योति यात्रा सिद्ध होगी एवं मंच दर्शन का तृतीय सूत्र मंच शक्ति व्यक्ति विकास पोषित एवं पल्लवित होगा।
यात्रा काल में पुस्तिकाओं एवं स्मारिकाओं के रूप में प्रकाशित मंच साहित्य मंच से संबंधित अनजाने पहलुओं को उजागर कर पाठकों की ज्ञानवृद्धि करेगा। इस साहित्य में मंच से जुड़े साथियों को अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होंगे। मंच प्रकाशनों की लोप संस्कृति पुनः उदित मुड़ में दिखाई देगी। मंच इतिहास में नए पृष्ठ जुड़ेंगे व पुराने पृष्ठों के धुंधले पड़ते प्रभावों को पुनः चमक प्राप्त होगी। ये प्रकाशन जहां पीड़ा अभिव्यक्ति का माध्यम बन कर चित्त को शांति प्रदान करेंगे, वहीं मंच शक्ति में इजाफा भी करेंगे। प्रकाशनों के अभाव में मंच से दूर होते पुराने युवा साथी पुनः मंच की तरफ उन्मुख होंगे। बैद्धिक क्षेत्रों में मंच विषयों पर चर्चाओं का दौर जीवंतता प्राप्त करेगा। ये प्रकाशन मानसिक विवेक जागृत कर ज्ञानस्रोत कहलाने के अधिकारी होंगे। यात्राकाल में मंच साहित्य प्रकाशन की योजना में इस यात्रा के ज्ञान ज्योति यात्रा नाम को प्रत्यक्षतः सार्थक सिद्ध करने की क्षमता प्रतीत होती है।
‘ज्ञान ज्योति यात्रा’ शब्दों का बारंबार उच्चारण इन शब्दों के गहरे अर्थ जानने हेतु जहां उत्प्रेरित करेगा, वहीं सामाजिक सम्मान की चाह रखने वाले तपस्वी व्यक्तित्वों की संख्या में भी वृद्धि करेगा। मंच साथियों एवं समाज मनीषियों की कुंडलिनी शक्तियों का जागरण कर यह यात्रा सामाजिक सम्मान एवं आत्म सुरक्षा की चाह कालांतर में पूरी करेगी-ऐसी भी मेरी अपेक्षा है। मंच दर्शन के इस चतुर्थ सूत्र के ऊपर प्रभावी कार्य का अवसर प्रदान करती है-यह यात्रा।
जिस सप्ताह में जिस शहर, नगर, ग्राम, में रजत जयंती समारोह आयोजित होने से, उस पूरे समाज सायंकाल मंच कार्यालय के समक्ष एवं क्षेत्र के समस्त निवासियों के घरों के समक्ष दीप प्रज्जवलित किये जाऐं। अधिकतर दीप प्रज्जवलन हेतु स्थानीय नागरिकों को भी प्रोत्साहित किया जाए। यह दीप ज्योति कार्यक्रम जहां भारतीय एवं मारवाड़ी संस्कृति के अनुसार है, वहीं स्थानीय निवासियों में मारवाड़ी समाज एवं मारवाड़ी युवा मंच के बारे में ज्ञानार्जन की चाह पैदा कर राष्ट्रीय एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। मंच दर्शन का पंचम सूत्र-राष्ट्रीय एकता एवं विकास यद्यपि ज्ञान ज्योति यात्रा के हर कार्यक्रम में परिलक्षित है, परन्तु दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम राष्ट्रीय एकीकरण की भावनायें जागृत करने का अच्छा माध्यम बन सकता है, बशर्ते कि स्थानीय समाज बंधुओं को इस कार्यक्रम में सही रूपेण शामिल किया जाए।
इंसान में अच्छाइयाँ उसकी गतिविधियों की देन होती है। मानसिक सुधार के लिये आवश्यक है। इंसान के दिमाग में ज्ञानविद्युत का संचार एवं विचारों की शुद्धता। ज्ञान ज्योति यात्रा आह्नान करती है-ईमानदारी से आत्मचिंतन हेतु। विगत 25 वर्षों में हुई भूलों के स्मरण हेतु। ऐसा आत्मचिंतन हमारे विचारों में शुद्धता पैदा करेगा एवं हमारे मानसिक सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा। आत्मचिंतन जनित यह मानसिक सुधार हमारे व्यक्तित्व में निखार लाएगा। ज्ञान की ज्योति जलायेगा। हमारे साधारण नेत्र ज्ञानचक्षु का रूप ले लेंगे। हमारे कान परनिंदा सुनने के लिये इंकार कर देंगे। सहनशक्ति विकसित होगी। क्षोभ एवं विद्रोह की भावनाएं अस्त होंगी। 100 दिवसीय ज्ञानज्योति यात्रा आह्नान करती है, ऐसे आत्मचिंतन का ऐसा आत्मचिंतन इस रजतजयंती वर्ष को ज्ञानज्योति पर्व के रूप में स्मरणीय बना देगा। हमारी अच्छाइयां उभरने लगेंगी। प्रस्तावित ज्ञान ज्योति यात्रा से जुड़े शीर्ष नेतृत्व से आग्रह है कि वे स्वयं भी आत्मचिंतन हेतु मंच से जुड़े हर युवा साथी के लिये प्रेरणा स्रोत बने। मंच का सौभाग्य है कि मारवाड़ी युवा मंच के प्रवर्तक श्री अरुण बजाज रजत जयंती समिति के चेयरमैन हैं। इस रजत जयंती वर्ष में मंच साथियों को उनसे अपेक्षा है कि रजत से स्वर्ण की मंच यात्रा का निस्कंटक मार्ग सुनिश्चित करें।
अग्नि पुराण में कहा गया है कि बच्चे भगवान का दर्शन मिट्टी या लकड़ी आदि से बने हुए भगवाननुमा खिलौनों में करते हैं। औसत बुद्धि के व्यक्ति का भगवान पवित्र जल धाराओं में रहता है। तपस्वी व्यक्तियों का भगवान दिव्यमंडल में स्थित होता है। विवेकी व्यक्तियों का भगवान इनके स्वयं के अंदर ही रहता है। ऐसी स्थिति ज्ञान की भी है। अधिकांश व्यक्ति अनुसरण कर ज्ञान प्राप्त करते हैं। चंद व्यक्ति श्रवण, अध्ययन एवं मनन के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करते हैं। ज्ञान के प्रचार प्रसार हेतु वाणी लोकप्रिय माध्यम है। लेकिन कर्म प्रेरित ज्ञान सर्वोपरि है।
राजस्थान के सुप्रसिद्ध कवि श्री सीताराम महर्षि की निम्न पंक्तियों में अन्तर्निहीत ज्ञान देखें।


पौध प्यार की यहां हर जगह लगाओ तुम,
आग जो घृणा की है प्यार से बुझाओ तुम।
दूर हो गये हैं जो प्यार से मिलाओं तुम,
विष चढ़ा संदेह का प्यार से उतारो तुम।।



[end]

January 12, 2009

परिवर्तन को रोकना असंभव -प्रमोद्ध सराफ


श्री प्रमोद्ध सराफ जी का नया लेख जो कि 'समाज विकास' पत्रिका के नये अंक - दिसम्बर '2008 में प्रकाशित हुआ है। "मंच समाचार" के पाठकों के लिये यहाँ पर जारी कर रहा हूँ। - शम्भु चौधरी


परिचयः श्री प्रमोद्ध सराफ का जन्म 19 सितम्बर 1952, फतेहपुर (शेखावटी), पिता: श्री लक्ष्मी नारायण सराफ, पत्नी का नामः श्रीमती राजकुमारी सराफ, 1965 में छात्र नेता के बतौर सार्वजनिक जीवन में प्रवेश। आपको अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के संस्थापक राश्ट्रीय अध्यक्ष होने का गौरव प्राप्त है। मारवाड़ी दातत्व औषद्यालय गुवाहाटी के पूर्व मानद मंत्री एवम् कामरूप चैम्बर आफ कॉमर्स, आसाम, गुवाहाटी स्टॉक एक्सचैंज के आप पूर्व सभापति भी रह चुके हैं। आप सामाजिक विषयों के प्रतिष्ठित लेखक के रूप में जाने जाते हैं। आपके लेखों से युवावर्ग पर विषेश प्रभाव पड़ता है। कवि हृदय श्री प्रमोद्ध सराफ ने अनेकों कविताओं की रचना भी की है।
पताः सराफ बिल्डिंग, प्रथल तल, ए.टी.रोड, गुवाहाटी, असम, फोन: 0361-2541381।


परिचर्चा का विषय है: कल, आज और हम। यानी परिवर्तन का हमारे ऊपर प्रभाव। हम यानी हमारा देश, हमारा समाज, हमारा परिवार एवं हमारा व्यक्तित्व।
कल तक कोई न कोई राजनीतिज्ञ हमारे देश का प्रधानमंत्री होता था, परन्तु आज एक अर्थशास्त्री। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बुद्धिवादियों का प्रतिनिधित्त्व बढ़ रहा है परन्तु राज्य मंत्रीमंडल, इस संदर्भ में, अभी भी प्रतीक्षाकाल की स्थिति में है। विकास की राजनीति का प्रतिष्ठाकाल प्रारम्भ हो चुका है, अन्यथा शीला दीक्षित, शिवराज सिंह चौहान व डॉ. रमण सिंह विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि होते हुए भी आज एक साथ अपने-अपने राज्यों में सन्तासीन नहीं होते। यानी जनता ने राजनैतिक दलों की जगह विकास रथ के सारथियों का राजतिलक प्रारंभ कर दिया है। आपसी खीचतान व नकारात्मक प्रवृतियों की अग्नि में रोटी सेंकने की राजनीति नेस्तनाबूद हो रही है, अन्यथा राजस्थान में सत्ता परिवर्तन नहीं होता। केन्द्र व राज्यों में एकदलीय सरकारें इतिहास बन रही थी व बहुदलीय सरकारें एक यथार्थ। विकास की राजनीति व सर्वभागिता सिद्धान्त के बल पर पुनः एकदलीय सरकारें प्रान्तीय स्तर पर उभर रही हैं। राष्ट्रीय हितों व दलीय हितों के सामंजस्य के बल पर नए राजनैतिक समीकरण उभरने शुरू हो गए हैं, अन्यथा समाजवादी दल केन्द्रीय सरकार को अपना समर्थन दे, जीवनदान नहीं देता। निवर्तमान राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे.कलाम के कार्यकाल में उनके लेखों एवं संभाषणों की श्रृंखला का राष्ट्र के युवाओं एवं बुद्धिजीवियों पर व्यापक प्रभाव राष्ट्रपति पद की एक नई भूमिका चिन्हीत करता है। अनुकरणीय आदर्श व्यकिृत्त्व के अभाव में दिग्भ्रमित होती युवापीढ़ी को डॉ. कलाम ने वैचारिक चेतना प्रदान करते हुए दिग्दर्शक के रूप में ऐतिहासिक कार्य किया। यानी देश के राजनैतिक पटल पर शुभ संकेतों के दीयों का जगमगाहट।
कल तक पूंजीवाद समाजवाद एवं साम्यवाद बहस के विषय थे, परन्तु आज आतंकवाद का अर्न्तराष्ट्रीय स्वरूप। हर युवा एवं काल में आतंकवाद किसी न किसी रूप में विद्यमान रहा है। कभी डाकुओं एवं लुटेरों का आतंकवाद वो कभी विभिन्न प्रकार के माफिया वर्ग का। कभी जमींदारों का तो कभी पूंजीवातियों का। कभी राजनेताओं का तो कभी श्रमिक नेताओं का। परन्तु वर्तमान का आतंकवाद भयानक महत्त्वकांक्षाओं का परिणाम है, असफल शासकों का उन्माद है एवं असहिष्णुताओं का वमन है। यह आतंकवाद घृणा की खाद एवं धार्मिक कट्टरता की सिंचाई के बल पर विकसित हो रहा है एवं फलफूल रहा है। आज आतंकवाद की अग्नि दावानल वन आहुतियां मांग रही है -उन प्राणियों की, जो साहसी हैं, कर्तव्यों के पुजारी हैं एवं राष्ट्रप्रेमी हैं। मुम्बई शहर में आतंकवाद के शिकार हुए समस्त अधिकारियों को शत् शत् प्रणाम। प्रभावित नागरिकों का स्मरण कर उनको अश्रु-श्रद्धांजलि। आज का अर्न्तराष्ट्रीय आतंकवाद गुरिल्ला युद्ध का रूप ले चुका है। इस आतंकवाद के खेतों एवं खलिहानों को तहस-नहस करने के सिवाए अन्य कोई विकल्प दिखाई नहीं देता एवं ऐसी सक्रियता में अगले विश्वयुद्ध का खतरा नजर आता है। अर्थात् इस आतंकवाद की समाप्ति हेतु अर्न्तराष्ट्रीय समुदाय तहेदिल से एक साथ नहीं है। यानी अर्न्तराष्ट्रीय पटल पर खतरे के लाल निशानों की मौजूदगी।
कल तक कोटा परमिटों का राज था, परन्तु आज भूमण्डलीकरण एवं उदारीकरण की नीतियां। महंगाई कल भी थी व आज भी है। सट्टाबाजारी का प्राबल्य स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् शनैः शनैः कम हुआ था। परन्तु उदारीकरण की नीतियों के अर्न्तगत, सट्टाबाजी ने वैधानिकता प्राप्त की है एवं साथ में संगठित स्वरूप भी। पिछले कुछ वर्षों में सट्टाजनित महंगाई के विभत्स रूप ने उपभोक्ताओं की योजनाओं को बारंबार विफल किया एवं लघु उद्योगों को अंततः बंदी के कगार पर पहुंचा दिया। उदारीकरण की नीतियों के परिणामस्वरूप रोजगार के अवसरों एवं पारिश्रमिकों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई परन्तु स्वरोजगार क्षेत्र विपरीत रूपेण प्रभावित हुआ। शापिंगमाल संस्कृति ने खुदरा व्यापारियों के समक्ष आस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। कल हरित क्रांति की चर्चाएं थी, आज सेंसेक्स एवं निफ्टी में उतार चढ़ाव की। वर्तमान में जनसाधारण की समाझ के बाहर है कि एक वर्ष में सेंसेक्स व निफ्टी में 60 प्रतिशत की गिरावट क्यों आई, जबकि देश के वित्तमंत्री प्रायः इस संदर्भ में सकारात्मक बयानबाजी, दूरदर्शन के चैनलों पर सतत् रूप से करते रहते थे एवं देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की मंदी से अप्रभावित बताते थे। सरकारी संरक्षणवाद कल तो था ही परन्तु आज उदारीकरण की नीतियों के युग में भी विद्यमान है। अमेरिका में उन दिवालिया फर्मों को सरकार बचाने में लगी है जिनके दिवालियापन का कारण प्रबंधन का लालच एवं गलत व्यापारिक नीतियां रही है। हमारे देश में पूंजीवादी बड़े प्रतिष्ठानों को ब्याज माफी का इतिहास समय समय पर बनता रहा है, परन्तु इस बार बड़े रूप में किसानों की कर्जमाफी ने संतुलन पैदा करने का प्रयास किया है। निष्कर्ष यही है कि सरकारी संरक्षणवाद कल भी था और आज भी है। स्वरूप में परिवर्तन अवश्य है। ग्रामीण एवं पहाड़ी क्षेत्रों के सही मायनों में विकास हेतु सरकारी नीतियों के सार्थक क्रियान्वयन हेतु सटीक माध्यम की प्राप्ति कल भी दूर थी और आज भी दूर ही है। यानी देश के आर्थिक मानचित्र पर शुभ-अशुभ दोनों संकेत मौजूद हैं। सट्टेबाजी का बढ़ता दायरा भयानक संकेत प्रतीत होता है, स्वरोजगार के अवसरों का कम होना भी भविष्य में खतरनाक सिद्ध हो सकता है। अविकसित क्षेत्रों के विकास की योजनाए सुकून प्रदान करती हैं।
परिवर्तन का प्रभाव हमारे मारवाड़ी समाज पर भी पूर्णरूपेण है। शिक्षा के प्रसार ने समाज बंधुओं की सोच में बड़ा परिवर्तन किया है। आज समाज का युवक स्नातक बनने के पश्चात् पुश्तैनी व्यापार की तरफ उन्मुख नहीं होना चाहता। बल्कि अपनी योग्यतानुसार किसी विषय में विशेष अध्ययन कर, योग्यता हासिल करना चाहता है एवं तदुपरान्त आय अर्जन हेतु क्षेत्र का चुनाव करता है। कल मारवाड़ी समाज में स्वरोजगार में संलग्न व्यक्तियों का सम्मान था। अतः नौकरी पेशा से परहेज किया जाता था। परन्तु आज समाज में नौकरी पेशा संलग्न व्यक्तियों की संख्या तीव्रगति से बढ़ रही है एवं इन्हें यथोचित सम्मान प्राप्त है। शिक्षा क्षेत्र में समाज की महिलायें सफलताओं के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। रोजगार एवं स्वरोजगार क्षेत्रों में समाज की महिलायें बेहिचक आगे बढ़ रही हैं व उन्हें परिवार का समर्थन प्राप्त है। खुदरा व्यापार में लगे छोटे व्यापारियों पर अवश्य अस्तित्त्व का खतरा पैदा हुआ है। ऐसे समाजबंधुओं को नए सिरे से विचार कर व्यापार के स्वरूप में परिवर्तन लाना होगा।
समाज में संयुक्त परिवार प्रणाली शनैः शनैः लोप हो रही है। परिवारों में आपसी सौहाद्र्र भी घट रहा है। कारणों के विश्लेषण की आवश्यकता है। अर्न्तजातीय विवाहों का प्रचलन बढ़ रहा है। यह भी कहा जा सकता है कि प्रेम विवाहों का प्रचलन बढ़ रहा है। यह परिवर्तन का प्रभाव है। इसे रोकने की न तो आवश्यकता है एवं न ही इस परिवर्तन को रोकना संभव प्रतीत होता है। विवाहों व अन्य परिवारिक उत्सवों के अवसर पर प्रदर्शन एवं अनावश्यक या बूते के बाहर व्यय करना समाजबंधुओं का प्रभाव बनता जा रहा है, जो कि शुभ संकेत नहीं। समाजबंधु मारवाड़ी संस्कृति को इस संदर्भ में भूलते जा रहे हैं। उन्हें पुनः याद करना चाहिये किः


‘‘दो मिनट की रोभली, उम्र भर की शोभली।
दो मिनट की शोभली, उम्र भर की रोभली।’’


इस कहावत में मारवाड़ी समाज की उन्नति का मूलमंत्र दिया हुआ है। मोबाईल संस्कृति व इन्टरनेट की नई संस्कृति से मारवाड़ी समाज के युवा संभव लाभ लेने के बजाए हानि वाले पक्ष पर ज्यादा समय गंवा रहे हैं। समाज के युवाओं में स्वाध्याय प्रवृति का दिनोंदिन ह्रास हो रहा हैं। सामाजिक संगठनों का कर्तव्य है कि इस संदर्भ में चेतना अभियान चलायें। समाज का युवा सामाजिक संगठनों से भी दूर होता जा रहा है। इस संदर्भ में भी यथोचित कार्यक्रमों की अपेक्षा सामाजिक संगठनों से हैं।
मारवाड़ी संस्कृति एवं सभ्यता के विभिन्न पहलुओं की जानकारी समाज के युवाओं को नहीं है। सामाजिक रीति रिवाजों का निर्वाह भले ही समाज का युवा करता हो, परन्तु उद्देश्यों की जानकारी उसे नहीं है। मारवाड़ी संस्कृति के संरक्षण एवं समयानुकूल उचित परिवर्तनों के साथ उसके प्रचार प्रसार की आवश्यकता कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी।[end]